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गोवर्धन पूजा 2018 : हर साल घट रही गोवर्धन की लंबाई, जानिए वजह

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लखनऊ। दीपावली की अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। इस त्यौहार का भारतीय लोकजीवन में काफी महत्व है। चूंकि इस बार दीपावली 7 नवंबर को मनाई जाएगी। इसलिए गोवर्धन पूजा 8 नवंबर को होगी। आज हम आपको गोवर्धन पूजा को मनाने के पीछे की धार्मिक कहानी बताने जा रहे हैं। जिससे आप इस त्योहार को मनाने का असली कारण जान पाएंगे।

जानिए क्या है गोवर्धन के आकार घटने की वजह?

धार्मिक मान्यतानुसार, श्रीकृष्ण ने अवतरण से पहले अपने निज-धाम चौरासी कोस भूमि, गोवर्धन और यमुना नदी को पृथ्वी पर भेजा था। गोवर्धन भारत के पश्चिम प्रदेश में, शालमली द्वीप में द्रोण पर्वत के पुत्र के रूप में अवतीर्ण हुए। एक बार पुलस्त्य मुनि तीर्थ भ्रमण कर रहे थे। मार्ग में विचित्र पुष्प व फलों वाले वृक्षों एवं झरने वाले परम रमणीय द्रोणाचल-नन्दन गिरिराज गोवर्धन को देखकर बड़े प्रसन्न हुए।

मुनि द्रोणाचल से मिले और उनसे बोले – मैं काशी में रहता हूं, काशी में गंगा जी हैं और विश्वेश्वर महादेव जी हैं, वहां जाने से पापी लोग भी तत्क्षण मुक्त हो जाते हैं। मेरी इच्छा है कि मैं गोवर्धन को काशी में स्थापित पर उस पर तपस्या करूं। आप अपना पुत्र मुझे दान में दे दें। उस समय गोवर्धन का आकार आठ योजन (चौंसठ मील) लम्बा, पांच योजन तक फैला तथा दो योजन ऊंचा था।

श्रीगोवर्धन ने इन्कार कर दिया। मुनि फिर उन्हें अपनी शक्ति से उठाने का प्रयास किया किन्तु सफल नहीं हुए। अन्तत: मुनि ने क्रोध में श्राप दिया – तुमने मेरा मनोरथ पूर्ण नहीं किया इसलिए प्रतिदिन तुम्हारा तिल के समान आकार कम होता जाएगा। तभी से गोवर्धन पर्वत एक-एक तिल करके छोटे हो रहे हैं।

कहते हैं जब तक पृथ्वी पर भगीरथी गंगा और गोवर्धन गिरि हैं तब तक कहीं भी कलि के प्रभाव की प्रबलता नहीं होगी। स्वयं भगवान श्रीकृष्ण जी ने श्रीगोवर्धन जी के तत्त्व को और उनकी महिमा को प्रकाशित किया है। श्रीकृष्ण ने ही देवताओं की पूजा बन्द करवाकर श्रीगोवर्धन पूजा का प्रवर्तन किया।

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