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जेनेटिक प्रॉब्लम के कारण जन्म लेते हैं अद्भुतु कहे जाने वाले बच्चे

देव श्रीवास्तव/लखीमपुर-खीरी।
बर्थ डिफेक्ट से ग्रसित एक नवजात का जन्म गुरुवार को सीएचसी मितौली में हुआ। इस बच्चे की आंतें पेट से बाहर हैं। यही कारण है कि यह बच्चा लोगों के आकर्षण का केंद्र  बना हुआ है। वहीं डॉक्टरों इसे जेनेटिक प्रॉब्लम बताया है।
  • प्राप्त जानकारी के अनुसार मितौली कस्बे के निवासी अजय सक्सेना की पत्नी पूनम को गुरुवार की सुबह प्रसवपीड़ा होने लगी जिसके बाद परिवार ने उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मितौली में भर्ती कराया। जहां पूनम ने एक बच्चे को जन्म दिया। वैसे तो यह बच्चा पूरी तरह स्वस्थ दिख रहा है, परंतु इसकी आंखें इसके पेट के बाहर निकली हुई हैं।
  • जिस कारण इस बच्चे को लेकर पूरे क्षेत्र में तमाम भ्रांतियां फैल गई और इसे देखने आने वालों का तांता लग गया। बच्चे के बारे में जानकारी देते हुए डॉक्टर निशांत गुप्ता ने बताया कि ऐसे बच्चों को अद्भुत नहीं कहा जा सकता है। यह एक बीमारी से ग्रसित होते हैं। जिसका नाम कंजेनाइटल डिफेक्ट है।

क्रोमोजोम के डिस्ट्रीब्यूशन में गड़बड़ी के चलते होते हैं ऐसे बच्चों का जन्म

  • ऐसे बच्चे जेनेटिक क्रोमोजोम के डिस्ट्रीब्यूशन में गड़बड़ी के चलते जन्म लेते हैं। गर्भ में ही ऐसे बच्चों की पहचान हो सकती है, जिससे अन्य रास्तों को अपनाकर छुटकारा पाया जा सकता है। अधिकतर यह समस्या ग्रामीण इलाकों में सामने आती है। अधिकतर मामलों में गर्भधारण करने के बाद गर्भवती महिला चिकित्सकों की निगरानी में नहीं रही होती है। आज मेडिकल साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है। अल्ट्रासाउंड सहित तमाम ऐसे टेस्ट हैं, जिनसे गर्भ में पल रही इस बीमारी का पता चल सकता है। शुरुआती दिनों में इसका पता चल जाने पर गर्भपात कराया जा सकता है।
  • यह एक जेनेटिक समस्या है, इससे घबराना नही चाहिए और न ही छिपाना चाहिए। गर्भवती महिला व उसके परिवार को यह ध्यान रखना चाहिए कि गर्भवती महिला की सभी जांचें चिकित्सक की निगरानी में करानी चाहिए। आज सभी सरकारी अस्पतालों में जांचों की सुविधाएं हैं। जिनका लाभ गर्भवती महिलाओं को मिल रहा है। सरकार भी गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा के लिए तमाम योजनाएं चला रही है। जिसका लाभ महिलाओं को उठाना चाहिए। क्षेत्र में फैल रही अफवाह पर उन्होंने कहां की यह बच्चा कोई अद्भुत बच्चा नहीं है, ऐसे बच्चे सामान्य नहीं माने जाते और अधिकतर मामलों में वह ज्यादा समय तक जीवित भी नहीं रहते हैं।
  • उन्होंने यह भी कहा कि आज मेडिकल साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है इसलिए ऐसे नवजात बच्चों का इलाज भी संभव है, परंतु वह बहुत महंगा है। सर्जरी के माध्यम से ऐसे बच्चों को ठीक किया जा सकता है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण अधिकतर ऐसे बच्चे काल के गाल में समा जाते हैं। सही परामर्श और देखरेख मां बच्चे के जीवन को तो बचाती ही है साथ ही ऐसी घटनाएं भी सामने नहीं आती हैं।
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