भारत में पहली बार हुआ ऐसा ऑपरेशन

img_20161126072009कुछ साल पहले ग्रेंट रोड पर रहने वाली फरहत शेख के पैरों में दर्द रहने लगा। उस वक्त उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि पैर में होने वाले दर्द का रिश्ता उनके गले की एक छोटी सी गांठ के साथ है।

38 की फरहत 2 बच्चों की मां हैं। वह पिछले काफी समय से बिस्तर पर ही थीं। कई बार डॉक्टर्स को दिखाया, लेकिन उनकी असली बीमारी पकड़ में नहीं आई। उनके गले में एक दुर्लभ किस्म का ट्यूमर था, जिसके कारण उनके शरीर में कैल्शियम का संतुलन बिगड़ गया था। यही कारण था कि फरहत को पैरों में काफी दर्द रहता था।जेजे अस्पताल बायकुला के जनरल सर्जरी विभाग में सहायक प्रफेसर डॉक्टर चिंतन पटेल ने बताया, ‘मांसपेशियों और तंत्रिकाओं के ठीक तरह से काम करने के लिए कैल्शियम की जरूरत पड़ती है। ट्यूमर के कारण उनके शरीर में उस हार्मोन का स्राव नहीं हो रहा था, जिसके कारण कि कैल्शियम और फॉसफॉरस का संतुलन बना रहता है।’जेजे अस्पताल में जब फरहत की जांच हुई, तो खून में कैल्शियम की काफी ज्यादा मात्रा पाई गई। डॉक्टर्स को उनके गले में सूजन दिखाई दी। अस्पताल के सर्जन डॉक्टर अमोल वाघ ने बताया कि फरहत को हंग्री बोन सिंड्रोम था, जिसके कारण कि उनकी हड्डियों में कैल्शियम की कमी हो गई थी और इसी कारण उनकी हड्डियां मुलायम और कमजोर हो गईं थीं।अस्पताल ने बताया कि फरहत के इलाज के उनका ट्रांस-ओरल इंडोस्कोरपिक पैराथाइरॉइड रिमूवल किया गया। भारत में पहली बार किसी मरीज का इस तरह इलाज हुआ है।डॉक्टर सौरभ गांधी ने बताया, ‘ज्यादातर ऑपरेशन में थाइरॉइड ग्रंथी को खुली तकनीक के इस्तेमाल से हटाया जाता है, इसके कारण गले पर निशान रह जाता है। इस केस में हमने इंडोस्कोपिक तरीके से ऑपरेशन करने का फैसला किया।’ 20 अक्टूबर को डॉक्टरों ने मुंह के अंदर बनाए गए छोटे-छोटे छेदों का इस्तेमाल किया और ट्यूमर से पीड़ित ग्रंथी तक पहुंचकर उसे हटा दिया। अगले एक हफ्ते में फरहत को अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की संभावना है।फरहत और उनके पति शेख अख्तर के लिए पिछले कुछ महीने भावनात्मक तौर पर काफी मुश्किल रहे हैं। फरहत रोजाना कुछ कदम चलने की कोशिश कर रही हैं। उनके पति इसमें उनकी मदद करते हैं। शेख ने बताया, ‘हमें कभी नहीं लगा था कि पैर में होने वाली यह तकलीफ गले की परेशानी के कारण है।’

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