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अजब-गजब कहानियांः इसलिए बुध कहलाते हैं गुरु की अवैध संतान

इसलिए बुध कहलाते हैं गुरु की अवैध संतान

नवग्रहों में राजकुमार के पद पर विराजमान बुध ग्रह जिन्हें ज्ञान, व्यापार और त्वचा का कारक माना गया है उनकी गुरु ग्रह से नहीं बनती है। दोनों ग्रहों के बीच शत्रुता है। इसके पीछे एक अजीबो-गरीब कहानी मिलती है मत्स्य पुराण में।

गुरु ने इसलिए बुध को त्याग दिया था

इस पुराण के अनुसार बुध और गुरु में शत्रुता इसलिए है क्योंकि अवैध संतान होने के कारण गुरु ने बुध का त्याग कर दिया था। कथा में बताया गया है कि चन्द्रमा ने एक बार इंद्रलोक पर अधिकार करने की इच्छा से भगवान विष्णु के कहने पर राजसूय यज्ञ किया।

चन्द्रमा के रूप से कन्याएं हुईं आकर्षित और

इस यज्ञ की समाप्ति पर जब चन्द्रमा स्नान करके आए तो इतने रूपवान हो गए कि कई कन्याएं चन्द्रमा के प्रति आकर्षित गईं। चन्द्रमा के रूप से उनके गुरु की पत्नी तारा भी आकर्षित थीं। चन्द्रमा ने उनके प्रति प्रेम दर्शाया और अपने साथ ले गए। इससे गुरु बहुत नाराज हुए और चन्द्रमा की शिकायत भगवान शिव से की गई।

चन्द्रमा ने किया गुरु की पत्नी को लौटाने से इंकार

भगवान शिव के कहने पर भी चन्द्रमा ने गुरु की पत्नी तारा को वापस करने से मना कर दिया। इससे भगवान शिव और चन्द्रमा के बीच युद्ध आरंभ हो गया। युद्ध में राक्षस गुरु शुक्राचार्य ने चन्द्रमा का साथ दिया। ब्रह्मा जी ने युद्ध को रोका और चन्द्रमा को समझा-बुझाकर गुरु पत्नी को लौटाने के लिए मना लिया।

इस तरह हुआ बुध का जन्म और फिर…

तारा गुरु के पास लौट गईं लेकिन कुछ दिनों बाद उन्होंने एक बालक को जन्म दिया। तारा ने बताया कि यह चन्द्रमा और उसकी संतान है। चन्द्रमा को जब इस बात की जानकारी हुई तो वह अपने पुत्र को साथ ले गया। इस तरह गुरु और बुध दोनों एक दूसरे के शत्रु बन गए।

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